आपकी हर समस्या दूर करेंगे हनुमान, करें ये 5 काम

जिन पुरुषों की कुंडली के सातवें भाव में क्रूर ग्रह हों या उस पर कू्रर ग्रहों की दृष्टि होने से विवाह में देर हो रही हो तो वे देवी अर्गला के इस मंत्र का जप करें –

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।

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दुर्गा सप्तशती के चौथे, पांचवें, और 11वें अध्याय का रोज पाठ करने से संकट दूर हो जाते हैं। मनोवांछित सिद्धि, धन, वैभव, सुख, शांति एवं संतान सुख प्राप्त होता है।

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कुंडली के दशम भाव में स्थित ग्रहों या इस भाव पर अन्य ग्रहों की दृष्टि से यदि काम में रुकावट आ रही हो तो सफलता के लिए ये मंत्र जपें- सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणी नमोस्तु ते।।

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जिन जातकों की कुंडली में असाध्य रोग के योग हों या जो रोगों से ग्रस्त हों वे देवी कवच के साथ इस मंत्र का जप करें और राई की आहुति दें, शीघ्र लाभ होगा।

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।

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जिन जातकों की कुंडली में अल्पायु या दुर्घटना के योग हों उन्हें देवी की आराधना के साथ देवी कवच का रोज पाठ करना चाहिए।

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ऊँ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के अलावा हर रोज भी इस मंत्र का यथसंभव 108 बार जप तन, मन व स्थान की पवित्रता के साथ करने से संक्रामक रोग सहित सभी गंभीर बीमारियों का भी अंत होता है। घर-परिवार रोगमुक्त होता है। इस मंत्र जप के पहले देवी की पूजा पारंपरिक पूजा सामग्रियों से जरूर करें। इनमें गंध, फूल, वस्त्र, फल, नैवेद्य शामिल हो। इतना भी न कर पाएं तो धूप व दीप जलाकर भी इस मंत्र का ध्यान कर आरती करना भी बहुत शुभ माना गया है।

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